कोरोना लहर नहीं सुनामी हैं :अब बच्चो को बचाने की चुनौती !
कोरोना लहर नहीं सुनामी हैं : अब बच्चो को बचाने की चुनौती ! पिछले सवा साल से भी अधिक समय से पूरी दुनिया में तहलका मचा रहे कोरोना की दूसरी लहर से भारत हलाकान हो रहा है | बल्कि इसको लहर न कह कर सुनामी कहा जाय तो बेहतर होगा | सुनामी पार्ट 2 का कहर भीषण ही नहीं भयावह होता जा रहा है | सुनामी पार्ट 1 के समय में तो लगातार लाकडाउन एवं लोगो में व्याप्त भय के कारण स्थिति इतनी ख़राब नहीं हुई थी जितनी इस बार दिखाई दे रही है | कारण, लगभग 9 माह तक तांडव मचाने के बाद जैसे ही कोरोना कुछ शांत हुआ भारत में लोग पूरी तरह से निश्चिन्त व् बेफिक्र हो कर सामान्य जीवन जीने लगे वे समझे की कोरोना थाली बजाने और दिए जलाने से भाग गया | जिसका असर बाजारों,मॉल्स एवं अन्य सार्वजानिक स्थानों पर साफ़ दिखाई देता था | त्योहारों में भी कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जिया खूब उड़ाई गयी, होली में तो जमकर हुड़दंग मचाया गया कही कोई सोशल डिस्टेंसिंग का खयाल नहीं रख्खा गया| लगभग 80 से 90 परसेंट लोग बिना मास्क के स्वछंद हो कर घूमने लगे लेकिन शायद कोरोना को लोगो की यह निडरता पसंद नहीं आयी और वो पहले से भी ज्यादा भयानक होकर सामने ...