पर्यावरणीय असंतुलन के भयावह परिणाम : केरल व् उत्तराखंड में जल प्रलय !

पर्यावरणीय असंतुलन के भयावह परिणाम : केरल व् उत्तराखंड में जल प्रलय !

मित्रो ,पिछले कई सालो से पर्यावरण के प्रति तमाम जागरूकता कार्यक्रम चलाये जाने,गोष्ठिया आयोजित किये जाने, तथा राष्ट्रीय से लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक सम्मलेन आदि आयोजित किये जाने  के बाद भी हम अपने पर्यावरण को सुरक्षित रख पाने में असमर्थ साबित हुए है ,यह जानते हुए भी कि, प्रकृति एवं पर्यावरण के बिना हमारा जीवन ही असुरक्षित हैं, हम विकास और भौतिकता के नाम पर अपने जीवन से खिलवाड़ करने से नहीं चूक रहे है | जबकि हमारी प्रकृति एवं बिगड़ता पर्यावरण हमें समय-समय पर विभिन्न आपदाओं के रूप में चेतावनी देता रहता है लेकिन हम अपने विकास और भौतिकता की अंधी दौड़ में उस चेतावनी को  निरंतर अनदेखा कर रहे है | पहाड़ो पर आये दिन होने वाली बादल फटने से लेकर भूस्खलन जैसी घटनाएँ इसका ज्वलंत उदाहरण है | 
                       भारत के विभिन्न हिस्सों में लगातार विकराल बारिश हो रही है | यहाँ तक कि मानसून की वापसी के बाद भी केरल,हिमांचल और उत्तराखंड में कुदरत का जो कहर देखने को मिला वह निश्चित ही दिल दहलाने वाला था | एक ओर जहां केरल के विभिन्न जिलों में बाढ़ और भूस्खलन को इस सदी की सब से बड़ी त्रासदी बताया जा रहा है वही उत्तराखंड के कई जिले व तहसीले भी बादल फटने,बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं का शिकार हुए है | यही हालात हिमांचल प्रदेश के भी है | केरल राज्य का लगभग पूरा हिस्सा बाढ़ ग्रस्त हो गया है,सरकारी आकड़ो के अनुसार अभी तक करीब 38000 से ज्यादा नागरिको को बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रो से निकाल कर सुरक्षित क्षेत्रो में पहुंचाया जा चुका है | अकेले करुवट्टा गांव के 3000 लोगो ने रहत शिविर में शरण ली है|"गोड्स ओन कंट्री" यानि की "ईश्वर का राज्य" कहे जाने वाले इस प्राकृतिक सुंदरता से पूर्ण प्रदेश में प्रकृति ने इतना रौद्र रूप क्यों धारण कर लिया | यही स्थिति देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड की है , झीलों का शहर कहे जाने वाले पर्यटन स्थल नैनीताल जिले के राम गढ़ में बादल फटने से हुई जल प्रलय और भूस्खलन के कारण कई होटल,घर व इमारते गिर गई | पूरे उत्तराखंड में करीब 50 से ज्यादा लोगो की मौत हो चुकी है तथा सैकड़ो लापता है | कुमायुं क्षेत्र में जल प्रलय का रूद्र रूप देखने को मिला | 100 से ज्यादा घर,सड़के,और दर्ज़नो पुल टूट गए | नैनीताल का संपर्क बाकी राज्य से कट गया है | लैंडस्लाइड के चलते सभी सड़के बंद है तथा बिजली,इंटरनेट व टेलीकॉम जैसी व्यवस्थाए पंगु हो गयी है | चारधाम यात्री भी जहा के तहा रोक दिए गए है | सिर्फ बद्री नाथ मंदिर में 2000 से  ज्यादा तीर्थयात्री रुके हुए है | उत्तराखंड सहित पूरे हिमालय क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं का सिलसिला लगातार जारी है | जून 2013 में बाबा केदार नाथ में आयी ऐसी ही एक आपदा में बादल फटने के बाद हुए भीषण जल प्रलय में हज़ारो  श्रद्धालुओ की  मौत हो गयी थी |       
                     मेरे  इस लेख का उद्द्येश्य उन हालातो को दोहराना नहीं है जो हमारे प्रकृति एवं पर्यावरण के असंतुलन से पैदा हुए है और न ही भौतिकवाद के विस्तार तथा  विकास को कोसना है  बल्कि हमारी कार्यप्रणाली एवं सोच पर्यावरण के संतुलन एवं प्रकृति के संरक्षण के समर्थन में होना चाहिए| ताकि विकास के साथ साथ  विनाश से बचा ज सके |     

 
                     
 निवेदक : वन पर्यावरण संरक्षण संघ 

आप का 

संजय शुक्ल  
(अध्यक्ष)

वन पर्यावरण संरक्षण संघ 

                  

         



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