होली की मस्ती में होरियारे !

 

होली की मस्ती में होरियारे !

                        हिंदुस्तान विविधताओं का देश रहा है जहा पर विभिन्न जातियों,धर्मो, संसकारो एवं विचारो के लोग प्रेम एवं सद्भावना के साथ रहते है |  शायद इसी लिए पूरी दुनिया इसे विश्व का सब से बड़ा एवं प्राचीन लोकतंत्र कहती है | इतने सारे धर्मो,जातियों एवं संस्कारो के अनुसार ही हमारे देश में विविध त्योहारों का मेला लगा रहता है | जिन में होली,दिवाली,ईद,बकरीद,क्रिसमस, लोहड़ी ,रक्षा बंधन,जन्माष्टमी,आदि अनगिनत त्यौहार शामिल है| लेकिन इनमे होली एक आपसी प्रेम,मिलन एवं भाईचारे व् सौहाद्र का त्यौहार है |  जिस में अमीर,गरीब,छोटे बड़े,मित्र-शत्रु आदि सभी वर्गों के लोग सभी  भेद भाव मिटा कर आपसी प्रेम एवं सद्भाव का सन्देश देते हुए एक - दुसरे को रंग-गुलाल आदि लगा कर गले मिलते है | 
 
                                           प्रत्येक वर्ष बसंत ऋतु के फाल्गुन मास में पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला होली का यह त्यौहार पूरी तरह से मस्ती में सराबोर रहता है| पूरे देश सहित नेपाल एवं अन्य देशो में मनाये जाने वाले होली के इस त्यौहार को ऐतिहासिक बनाने वाली कई कहानिया प्रचलित है | जहां एक ओर इसे भगवान श्री कृष्ण एवं माता राधा जी के शाशवत प्रेम एवं अठखेलियों के स्मरण के  रूप में मथुरा-वृन्दावन के नगरवासिओ द्वारा हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है | जिस में गोपालो द्वारा गोपियों के ऊपर रंग-गुलाल आदि डाला जाता है तो गोपियों द्वारा इसके प्रतिरोध में लठ्ठ चलाये जाते है जिसे हमलोग "बृज की लठ्ठमार" होली के नाम से जानते है | वही दूसरी ओर इस त्यौहार को बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में भी मनाये जाने की परंपरा बरसो से चली आ रही है जिस के अनुसार हिरणाकश्यप का वध भगवान् विष्णु के द्वारा नरसिंह अवतार लेकर किया गया था | हिरणाकश्यप एक दैत्य था जिसका पुत्र प्रह्लाद भगवान् श्री विष्णु जी का परम भक्त था| यह बात हिरणाकश्यप को कदापि स्वीकार्य नहीं थी कि उसका पुत्र भगवान् विष्णु की पूजा करे इस लिए उसने अपने पुत्र की हत्या करने की योजना बनाई| तभी भगवान् विष्णु को अपने परम भक्त की रक्षा करने हेतु नरसिंह रूप में प्रकट होना पड़ा| 

 
                       
                         कहते है कि हिरणाकश्यप की बहन को वरदान प्राप्त था की उसको अग्नि भी जला नहीं सकती है जिस का फायदा उठाते हुए दैत्य हिरणाकश्यप ने सुनुयोजित तरीके से अपनी बहन को आदेश दिया कि वह भक्त प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए ताकि उसकी बहन तो बच जाए किन्तु प्रहलाद अग्नि में भस्म हो जाए लेकिन प्रभु की लीला से हुआ इसका उल्टा भक्त प्रहलाद तो सुरक्षित बच गए किन्तु हिरणाकश्यप की बहन ही अग्नि में भस्म हो गयी | दरसल ब्रम्हा जी ने हिरणाकश्यप की बहन को अग्नि में न जलने का वरदान इस शर्त के साथ दिया था की वह कभी भी इस का दुरपयोग नहीं करेंगी | तो जैसे ही उसने इस वरदान का दुरपयोग किया उसकी शक्ति समाप्त हो गयी और ईश्वर ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा कर के "बुराई पर अच्छाई" की विजय का सन्देश दिया | इसी के फलस्वरूप आज भी हिन्दुस्तान की गली-गली,सड़क-सड़क,चौराहे-चौराहे अग्नि में हिरणाकश्यप की बहन को जला कर भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने का सन्देश देकर "होलिका दहन" होता है | 


                     
                              इन्ही कहानियो के साथ साथ बनारस में "मोक्ष शमशान" स्थल पर चिताओ की भस्म के साथ होली खेले जाने की परंपरा सदियों से चलती चली आ रही है | कहते है कि फाल्गुन की एकादशी को यहाँ बाबा विश्वनाथ जी की पालकी निकलती है और अपार  जन समूह  सम्मिलित हो कर रंग-गुलाल  के साथ होली खेलते  है |ऐसी मान्यता है की बाबा विश्वनाथ जी माता पारवती जी का गौना कराने के बाद लौटकर  आने पर अपने औघड़ स्वरुप में शमशान जाकर चिताओ की भस्म से अपने गणो के साथ होली खेलते है | बाबा विश्वनाथ की नगरी बनारस में होली का अपना ही रंग है | 




                   सब जगह की होली के इतर यदि कानपुर की होली और इस से भी अलग "होली गंगा मेला" का जिक्र न हो तो बात अधूरी रह जाती है | वैसे तो पूरे देश में मनाये जाने वाले इस रंगोत्सव का अपना ही आनंद है लेकिन कानपूर की होली सब से अलग एवं विशेष मानी जाती है | कनपुरियों में होली  को लेकर विशेष उत्साह एवं उल्लास दिखाई देता  है | यहाँ की होली एक-दो दिन नहीं बल्कि पूरे  सफ्ताह मनायी जाती है |  जिस का एक ऐतिहासिक कारण है -हिन्दुस्तान में अंग्रजो के शासन के दौरान कानपुर में तत्कालीन अधिकारियो द्वारा होली खेलने से  मना करने के बावजूद  युवको  ने खूब रंग खेला और होली का त्यौहार बड़ी धूम धाम से मनाया  जिस से गुस्साए अधिकारिओ ने लाठी चार्ज करके तमाम नागरिको को गिरफ्तार कर के जेल  भेज दिया ,फलस्वरूप क्रांतिकारिओं ने कानपुर में अंग्रेजो के खिलाफ आंदोलन तेज़ कर के अधिकारिओ की नींद हराम  कर दी | जिस से भयभीत हो कर अंग्रेज अधिकारिओ ने सभी "होरियारों" को बिना शर्त रिहा कर दिया | जिस दिन सभी होरियारों की रिहाई हुई उस दिन अनुराधा नक्षत्र था | तब से  लेकर आज तक होली के बाद आने वाले अनुराधा नक्षत्र में कानपूर नगर स्थिति माँ गंगा के किनारे सरसैया घाट पर प्रशासन के सहयोग से सार्वजानिक "होली गंगा मेला" का आयोजन विधिवत होता आ  रहा है | जिस में शहर के जिलाधिकारी,आयुक्त,नगरायुक्त,पुलिसआयुक्त,जिलाजज,मजिस्ट्रेट,सहित सभी उच्चाधिकारी, कर्मचारी,सांसद,विधायक, मंत्री व जनप्रतिनिधि तथा नेता गण आम जनता से गले मिल कर गंगा मेला की शुभकामनाये देते है | इसे कनपुरिये गुलामी के विरुद्ध क्रांतिकारिओं की विजय  के रूप में मनाते हैं | 

                                                 मित्रो जहा इस प्रेम,श्रद्धा बुराई पर अच्छाई की विजय,हर्ष - उल्लास,और क्रांतिकारिओं की विजय  के पर्व  को हम बड़े ही सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाते है वही कुछ असमाजिक लोग इस पवन पर्व पर अपनी कुत्सित विचार धाराओं द्वारा बदरंग करने से पीछे नहीं रहते है | त्यौहार  के इस  अवसर का लाभ उठाते हुए बाज़ार में नकली खोया,अशुद्ध मिठाईया एवं जहरीली शराब आदि की खेप उतारी जाती है जिस से समाज में बड़ी संख्या में  लोग बीमार होते है | 

                                            अतः अंत में हम  अपनी बात यह कह कर समाप्त करते है कि  रंगो एवं प्रेम,सद्भाव,भक्ति 
 व् आपसी मिलन के इस त्यौहार को बदरंग बनाने वाले तथा कथित मिलावटखोरों व असमाजिक तत्वों से सावधान रहते हुए अपना त्यौहार अपने साथियो के साथ मनाये तथा सुरक्षित रहे | 

       विशेष निवेदन : कृपया शुद्ध आचरण,प्राकर्तिक रंगो, गुलाल-अबीर एवं  मिष्ठान         के   साथ  अपना त्यौहार मनाये | 

धन्यवाद !                          

आप को सपरिवार शुभ होलिकोत्सव की हार्दिक शुभकामनाये | 

आप का,
संजय शुक्ल 

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